पद्मभूषण डॉ. पंडित पुट्टराज कवि गवाईजी
1914 – 2010
चलते-फिरते देवता, शास्त्रीय संगीत के उस्ताद और साहित्यकार
आध्यात्मिक और जीवन यात्रा
पद्म भूषण डॉ. पंडित पुट्टराज कवि गवाई एक संगीत सम्राट, बहुभाषाविद् और समाज सुधारक थे। हावेरी जिले के देवगिरि में जन्मे पुट्टय्या (बचपन का नाम) ने बचपन में ही अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। माता-पिता के असमय निधन के बाद उनके मामा ने उन्हें पं. पंचाक्षर गवाई के संरक्षण में सौंप दिया। अपने गुरु की देखरेख में उन्होंने संगीत और साहित्य का गहन अध्ययन किया।
सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान
1944 में अपने गुरु के निधन के बाद उन्होंने वीरेश्वर पुण्याश्रम की जिम्मेदारी संभाली। अगले 66 वर्षों तक उन्होंने हजारों दृष्टिहीन बच्चों को मुफ्त हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत सिखाया। वे दस से अधिक शास्त्रीय वाद्ययंत्र बजाने में निपुण थे। आश्रम के मुफ्त भोजन और आवास के खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने "गुरु कुमारेश्वर कृपा पोषित नाट्य कंपनी" की स्थापना की और नाटक लिखे।
दिव्य विरासत और सीख
उनका साहित्यिक योगदान अद्वितीय था; उन्होंने कन्नड़, संस्कृत और हिंदी में 80 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उन्होंने ब्रेल लिपि में भगवद गीता का ऐतिहासिक अनुवाद किया। संगीत और समाज सेवा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 2008 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। 17 सितंबर 2010 को 96 वर्ष की आयु में उनका महासमाधि में विलय हो गया।