ಕನ್ನಡ English हिन्दी
Hanagal Kumaraswamy & Pt. Panchakshara Gawai
Hanagal Kumaraswamy & Pt. Panchakshara Gawai Pt. Puttaraj Gawai
|| श्री गुरु कुमार वन्दे ||

सुक्षेत्र श्री वीरेश्वर पुण्याश्रम

परमपूज्य, गानयोगी, कवियोगी

पंडित पंचाक्षर गवाई

पद्वभूषण डॉ. पंडित पुट्टराज कवि गवाई

Pt. Puttaraj Gawai

Pandit Panchakshara Gavaiji – Founder, Shree Veereshwara Punyashrama

पंडित पंचाक्षर गवाईजी
दिव्य आत्मा

पंडित पंचाक्षर गवाईजी

1892 – 1944

श्री वीरेश्वर पुण्याश्रम के संस्थापक और महान संगीत साधक

गानयोगी संस्थापक शास्त्रीय गायक

त्वरित तथ्य

जन्म तिथि फ़रवरी 2, 1892
महासमाधि जून 11, 1944
जन्मस्थान कडशेट्टीहल्ली, हानगल तालुक, कर्नाटक
भूमिका / योगदान वीरेश्वर पुण्याश्रम की स्थापना, दृष्टिहीन और अनाथ बच्चों के लिए मुफ्त संगीत और आवासीय शिक्षा
पूर्वाधिकारी हानगल गुरु कुमार महास्वामीजी (गुरु)
उत्तराधिकारी पं. डॉ. पुट्टराज गवाई (परम शिष्य)
वाद्ययंत्र हारमोनियम, तबला, वायलिन, सारंगी, गायन
प्रमुख रचनाएँ संगीत शिक्षण पद्धति, भक्ति संगीत रचना
पुरस्कार एवं सम्मान गानयोगी (जनता द्वारा प्रदत्त सम्मान)

आध्यात्मिक और जीवन यात्रा

पंडित पंचाक्षर गवाई जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद संगीत और मानवीय संवेदना की एक अनूठी प्रतिमूर्ति थे। हानगल तालुक के कडशेट्टीहल्ली में जन्मे गदिगैय्या (बचपन का नाम) की संगीत प्रतिभा को हानगल कुमार स्वामीजी ने पहचाना। उन्होंने उनका नाम बदलकर "पंचाक्षर" रख दिया और उन्हें संगीत की उच्च शिक्षा दिलाई।

सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान

पंचाक्षर गवाई ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक दोनों संगीत परंपराओं में महारत हासिल की। मैसूर के विद्वान वेंकटरमणय्या, किराना घराने के उस्ताद अब्दुल वाहिद खान और पंडित नीलकंठ बुआ आलूरमठ जैसे महान गुरुओं से शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने हारमोनियम, तबला, वायलिन और सारंगी जैसे कई वाद्ययंत्रों पर असाधारण नियंत्रण प्राप्त किया।

दिव्य विरासत और सीख

1942 में दानवीर बसरीगिदद वीरप्पा द्वारा गडग में दान में दी गई भूमि पर उन्होंने स्थाई रूप से "श्री वीरेश्वर पुण्याश्रम" की स्थापना की। आश्रम का मुख्य उद्देश्य अनाथ और दृष्टिहीन बच्चों को मुफ्त भोजन, आवास और संगीत शिक्षा प्रदान करना था। 11 जून 1944 को उनका निधन हो गया। उनकी इस महान विरासत को उनके परम शिष्य पंडित पुट्टराज गवाई ने आगे बढ़ाया।

Scroll to Top